मंगलवार, 21 अगस्त 2007
आजाद भारत के छः दशक ..........
आजादी के छः दशक बाद भारत के विकाश के बारे मे कई मंचों से आनेक प्रकार की चर्चाएँ चल रही है। परंतु भारत के आब तक के विकाश पेर जब हम दृष्टि डालते है तो कोई स्पष्ट चित्र नही उभरता जिससे हम देश के भविष्य के बारे मे उत्साहित हो या भयभीत हो। इसमे संदेश नही कि कई मायने मे हम आज उस स्तिथी से कही बेह्तेर हैजो आज़ादी का सुरज उगने के समय थी। भारतीय अर्थ्वयास्था अपने शीर्ष दौर मे है। सेंसेक्स लगातार बढ़ रह है । करीब ८ प्रतिशत के रफ़्तार से बढती अर्थ्वायास्था मे सिर्फ एक ठेलिफों कम्पनी भारती ऐर्तेल के पास ही २.५० करोरः ग्राहक है,ये संख्या बहुत सारे यूरोपीय देशो की जनसंख्या से ज्यादा है............नै अर्थावयास्था की प्रतिनिधी कम्पनी इन्फोसिस मे जिन लोगो ने १९९३ मे १०,००० रूपये लगाए थे वे अब २करोर् रुपये से ज्यादा के मालिक है............हाल मे नाभिकीय और अंतरिक्ष कार्यक्रम , संचार क्रान्ति तथा सुचना क्रान्ति मे जो नए प्रतिमान स्ताथापित किये गए है उसने देशको विश्य्व को अग्रणी देशो मे स्थान दिला दिया है । लेकिन इस तथ्य के विपरीत एक तथ्य यह भी है कि पिचले पांच वर्षो मे लगभग १ लाख किसानो ने आर्थिक तंगी के कारण आत्महत्या करने के लिए विवश हो चुके है। भारत मे ३० करोर लोग गरीबी रेखा के नीचे है,आज भी देश मे दुनिया मे सबसे आधिक गरीब आशिखित और कुपोषित लोग रहते है। कम क्रय शक्ति के कारण देश के २५ करोड़ लोग हेर दिन भूखे पेट सोते है,जहाँ तक आर्थिक सम्पन्नता की बात है तो तथ्य ये भी है कि देश की १०० करोड़ आबादी मे से केवल २० लाख लोग ही आयाकेर्दाता है। दुनिया के भ्रस्त देशो मे भारत शीर्ष स्थान पर है । आतंकवाद ,उग्रवाद और नक्सली हिन्षा ने देश के एक बडे हिस्से मे माहौल को रक्तमय बाना रखा है। इस समग्र स्तिथी मे जो बात सबसे अधिक कष्ट की है कि भारत उन गुणों से भी दूर होता जा रहा है ,जो भारत की पहचान हुआ करती थी। प्राचीन घ्यान ,श्रेस्थ मानवीय गुन , सूहर्द और वसुधैव कुटुम्बकम की अतुलनीय भावना हमारी पहाचां थिजो आज के सार्वजनिक जीवन मे दुर्लभ है। अगर हम आपने प्राचीन गौरव को पूना तलाशे और इस देश को सांस कृत व सामजिक ताने बाने पेर लग चुकी जंग को साफ केर आपने राजनीतिक और प्रशाशानिक संगठनो को नै प्रेरणा प्रदान केर सके तो निश्चित रुप से भारत सही आर्थो मे आपने महान भविष्य के प्रति आश्वस्त हो सकता है। .............................
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2 टिप्पणियां:
हिन्दी चिट्ठाजगत में स्वागत है।
संजय जी
नमस्कार
आपका हिन्दी चिट्ठाजगत में अभिनंदन है। लेख पढ़ा अच्छा लगा।
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